🙏नमस्कार !

मनुष्य एक सोचने समझने वाला प्राणी है।यह हमारी एक शक्ति है।हम अपनी सोच से कुछ भी सोच सकते है और उस आधार पर हम बहुत से निर्णय हर रोज़ लेते है।हमारी सोचने की क्षमता ही हमें नए नए विचार देती है।और हमें motivate और inspire करती है।
हमारी सोचने की क्षमता ही हमें अच्छे और बुरे कार्यों का ज्ञान करवाती है।
लेकिन हद से ज्यादा सोचना भी हमारे लिए बहुत बार नुकसान दायक होता है।इससे हम सही निर्णय लेने की क्षमता खो सकते और सच्चाई से दूर हो सकते है।
कुछ लोग सोचते हैं कि ज्यादा सोचना अच्छा होता है, क्योकि यह लोगो को कुछ plan करने में समय देता है।और हेल्प करता है।,लेकिन ऐसा नहीं है क्योकि ज्यादा सोचने से हमारा टाइम भी तो ख़राब हो रहा है और साथ में हम कंफ्यूज भी हो जाते है।
इसलिए overthinking हमारी सहायता करने की बजाय हमें नुकसान पहुंचाती है।
√√”अत्यधिक सोचने (over thinking ) के 7 नुकसान■ 
📝1. खुद से विश्वाश उठ जाना :-
Over thinking का सबसे बड़ा नुकसान यही है की हम खुद से ही अपना भरोसा खो देते हैं। ज्यादा सोचने से हमें अंत में लगने लगता है की ये गलत है और कैसे सही करे।ये विचार शुरू हो जाते है।
हम खुद की सोच से निर्णय नहीं ले पाते है और अंत में परेशान होकर कोई गलत निर्णय लेना पड़ता है।
जिससे हमें अंत में हमारी निर्णय लेने की क्षमता से ही विश्वाश उठ जाता है।
📝2. हमेशा असुरक्षित महसूस करना:-
ज्यादा सोचना हमारी खुशियो को मार देती है। अत्यधिक सोचने के कारण हम उस चीज़ में इतना खो जाते है की फिर हमें हर चीज़ गलत नज़र आती है और हम हर चीज़ पे थोडा संशय करना शुरू कर देते है।।
हमें लगने लगता है की हम असुरक्षित हो रहे है।
📝3. सच्चाई से दूर हो जाना:-
Overthinking यानि अत्यधिक सोचने से हम इस स्थिति में पहुँच जाते है कि हमारे मन में अलग अलग विचार आने शुरू हो जाते है, जैसे क्या होगा?,ऐसा ना हुआ तो?,।
फिर हम ये भूल जातें है कि हम करना क्या चाहते है? हमें हर चीज़ में खतरा महसुस होता है। बार बार सोचने से हम उस चीज़ से अपनी पकड़ खो देते है और हम भूल जाते है कि हम है कहाँ? और सचाई से दूर हो जाते हैं।
📝4. समय की बर्बादी:-
किसी चीज़ और कार्य के बारे में बार बार वही सोचना ,तो समय की ही बर्बादी मानी जाती है। क्योंकि जो समझना होता है वो तो एक बार में भी समझ सकते है।
ज्यादा और सोचने से फिर उस चीज़ के बारें में हमें और गलत ही ख्याल आने शुरु होते है।और फिर हम गलत ही सोचते है और अपना काम भी पूरा नहीं कर पाते है।
📝5. खुशियों का पतन होना :-

बार बार सोचेंगे तो मन में गलत ही ख्याल आयेंगे ।वो हमें डरा कर रख देंगे।हम खुद पे भरोसा खो देंगे।और हर समय डर सा बना रहता है।जिससे हम अपनी ही खुशियों को खो देते है।
📝6. चिंता ,गुस्सा,डर का पैदा होना:-
ये हम सभी जानते है कि जब हम किसी काम को ढंग से नहीं कर पायेंगे तो चिंता होना,गुस्सा होना ,ये जाहिर सी बात है। अत्यधिक सोचना भी यही करवाता है। क्योंकि जयादा सोचने से आदमी का दिमाग ज्यादा ख़राब होता है।और फिर वो कोई गलत काम ही करता है। और अंत में डर ,भय,और गुस्से का शिकार हो जाता है।
📝7. अपने ही डर से छुपाना :- 
ज्यादा सोचने से हम अपने ही डर से छुपना शुरू कर देते है। क्योकि जब हम ज्यादा सोचते है तो कई बार गलत ख्याल आते है और हम फिर थोड़े डर से जाते है । और फिर इस डर की वजह से वो काम छोड़ देते है। इस तरह हम अपने ही दर से छुपना शुरू कर देते है।
🎯तो इस तरह से ज्यादा सोचने (ओवर थिंकिंग) से हमें फायदा कम और नुकसान ज्यादा होते है। हमें एक लिमिट तक सोचकर किसी काम को पूरा कर लेना चहिये।over thinking से लगभग काम ख़राब ही होते है।
अंत में सोचना आपका काम है, आप क्या सोचेंगे ये भी आपका ही निर्णय है। लेकिन अगर आप सोच समझकर सोचेंगे तो नतीजे कुछ और अलग ही होते है।

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