🙏नमस्कार ।।

एक शहर था। जिसमे दो दोस्त रहते थे।वो दोनों दोस्त बहुत ही सच्चे दोस्त थे,वे हर काम को साथ रहकर ही करते थे।बचपन से ही दोनों गरीब परिवार में पले बढे थे। छोटी सी उम्र में ही काम करने लग गए थे।

उनका काम था लोगो को चीज़ों को बेचना । वे दोनों दोस्त हर रोज़ आकर एक गली में खड़े हो जाते थे। एक गली के इस तरफ और दूसरा गली के उस तरफ।

कोई भी वयक्ति उस गली से गुज़रता तो वो उस आदमी को अपनी चीज़ बेचने दौड़ते थे। अगर वह इंसान उस चीज़ के लिए मना कर देता तो उससे डराते की भगवन का श्राप लगेगा,आपके परिवार में खुशि नहीं रहेगी। आपके साथ अनर्थ होगा और अंत में वह उस चीज़ को उस आदमी को बेच देते थे। कहते की ये चीज़ आपको फायदा देगी।

इस प्रकार उनका काम चल रहा था। लेकिन धीरे धीरे लोगों को पता चलने लगा तो उनका ये काम भी फ़ैल हो गया। अब दोनों परेशान हो गए और सोचने लगे की अब तो कुछ बड़ा ही काम करना पड़ेगा।

एक दिन दोनों दोस्तों ने बैठकर तय किया की अब वे दोनों कुछ कमाने के लिए बाहर जायेगे। दोनों ने कहा की वे दोनों अलग अलग दिशा में जायेगे।

एक दोस्त कमाने के लिए शहर से उतर दिशा में चला गया और दूसरा दोस्त दक्षिण में चला गया।

जो दोस्त उतर दिशा में गया था उसे कुछ दिन बाद एक सेठ की दुकान में काम मिल गया। उसने उस दिन से सेठ के साथ मिलकर बहुत मेहनत की और एक अच्छा पैसे वाला आदमी बन गया।

दिन बीते जा रहे थे और उसकी उम्र भी बढ़ती जा रही थी। फिर अंत में उनसे सोचा क्यों न अब बहुत पैसा कमा लिया ।अब इस सेठ की दुकान को छोड़ कर कुछ और काम करते है। और वह अपने घर को वापिस आ जाता है।

फिर काफी दिनों बाद वह किसी काम के एक शहर को जाता है।तो बीच रस्ते में वह एक संत के आश्रम को देखता है और वहा रुक जाता है। फिर वह उस संत की बातें सुनता है। और फिर सोचता है कि यार ये तो वही बातें है जो हम लोगो को डरा कर के अपना सामान बेचा करते थे। फिर यहाँ ये इतनी भीड़ क्यों रहती है।ये बातें तो हमें पता ही है।

फिर वह उस संत के बारे में पता करता है कि वह कौन है?

फिर लोग बताते है कि ये बहुत बड़े और पुराने संत है।

कुछ समय बाद संत बाहर जाने के लिए बाहर आते है तो उनकी नज़र उस आदमी पर पड़ जाती है। वह संत पहचान लेता है कि वह उसका पुराना दोस्त है। लेकिन वो दोस्त नहीं पहचान पाता है क्योंकि उसने बहुत बड़ी दाड़ी राखी हुई थी। और वेशभूषा भी अलग पहन रखी थी।

 वह संत जैसे ही अपनी गाड़ी में बैठने लगता है तो धक्का देकर अपने दोस्त को भी गाड़ी में धकेल लेता है।

वह आदमी हका बक्का रह जाता है की इसने मुझे अंदर क्यों डाल लिया और वह डर जाता है।

फिर उसका दोस्त अपना असली चेहरा दिखता है और कहता की तू यहाँ क्या कर रहा है।

फिर उसका दोस्त अपने संत दोस्त से पूछता है कि यार तूने ये सब कैसे कर लिया।

और इतनी जनता को कैसे इकठा कर लिया ।क्या किया तूने। बातें तो तू वही बताता है जो हम बचपन में हम लोगो को सामान बेचने के लिए बताते थे।

 फिर उसका दोस्त बताता है की दोस्त यही तो बात है जिस दिन मैं कमाने के लिए निकला था उस दिन मुझे एक बाबा दिखाई दिये और कुछ लोग वहाँ खड़े थे। वो भी लोगो को अपनी बचपन वाली भगवान की बातें बता कर लोगो को डरा रहे थे और लोग डर से उसके पास आ भी रहे थे। उस दिन मैंने भी सोच लिया की आज के बाद मैं भी यही काम करूँगा।क्योंकि ये दुनिया बहुत डरपोक है ,लोग यहाँ डर कर कुछ भी करने को तैयार रहते है। इन्हें डरा कर कही भी ले जा सकते है। मैंने इसी बात का फायदा उठाया और आज तुम्हारे सामने हूँ।

फिर उसके दोस्त को सारी सच्चाई समझ में आ गयी थी कि यहाँ इस दुनिया में लोग बहुत डर से रहते है । उन्हें कोई भी डरा सकता है। हर इंसान डरा हुआ है कोई किसी पारिवारिक समस्या से ,तो कोई नोकरी के लिए ,कोई भगवान के डर से। यहाँ हर जगह डर भरा हुआ है। और उस दिन से उसके समझ में आ गया की डर ही हमारी सफलता के बीच का सबसे बड़ी रुकावट है।

तो दोस्तों हमें उस डर के साथ नहीं जीना है। हमें निडर होकर जीना चाहिए। वर्ना फिर हमें कोई भी बेवकूफ नहीं बना सकता है। अगर डरकर जीते रहेंगे तो हमें कोई भी आदमी मुर्ख बना सकता है और हम बन भी सकते है क्योंकि हमें डर है की कुछ बुरा ना हो जाये। इसलिए डरे नहीं,खुलकर जिए।

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